रोडवेज लिपिक ने किया फर्जीवाड़ा, विभाग को एक माह तक लगाई चपत, छानबीन पर उड़े अधिकारियों के होश

रोडवेज में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। भैंसाली डिपो में परिचालक द्वारा यात्रियों से किराये के रूप में वसूली गई रकम एक माह बाद रोडवेज के खजाने में जमा कराई गई। मामले में लिप्त कर्मचारी रकम डकार जाते, अगर परिचालक तनख्वाह कम मिलने की शिकायत अधिकारियों से न करता। शिकायत पर मामले की छानबीन की गई, तब मामला पकड़ में आया। इस तरह का मामला सामने आने के बाद उच्च अधिकारियों के होश उड़ गए हैं। एआरएम के निर्देश पर मामले की जांच शुरू कर दी है।भैंसाली डिपो में तैनात संविदा परिचालक रवि कुमार 10 दिसंबर 2020 को रोडवेज की अनुबंधित बस संख्या यूपी 87टी 1853 लेकर मेरठ बागपत रूट पर गया था। 416 किलोमीटर की दूरी तय कर 12 दिसंबर को उसने डिपो के कार्यालय में टिकटों की बिक्री के रूप में वसूले गए 16,397 रुपये संबंधित/स्पाट लिपिक को जमा करा दिए। दिसंबर की तनख्वाह जब रवि को मिली तो उसमें तीन हजार रुपये कम निकले। उसने अधिकारियों से शिकायत की। मामले की जांच की गई तो पता चला कि 10 से 12 के बीच तो वह अनुपस्थित था।

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