UuGanga expressway: पर्यावरण मंजूरियों संबंधी तमाम दिक्कतों के दूर होने के बाद 602 किमी लंबे  गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को एक नया जीवन मिल गया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025 तक इस प्रोजेक्ट के पूरा करने की समय सीमा रखी है।

मुंबई-नागपुर के 701 किमी लंबे एक्सप्रेसवे के बाद यह दूसरा सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है. गंगा एक्सप्रेसवे पश्चिम उत्तर प्रदेश में मेरठ से कनेक्ट होगा, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रयागराज से जुड़ेगा.

इस सब के अलावा यह एक्सप्रेसवे 13 जिलों को जोड़ेगा, खासकर बड़े औद्योगिक शहर इससे कनेक्ट होंगे. इनमें मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, राय बरेली, अमेठी, प्रतापगढ़ और प्रयागरा​ज जैसे शहर शामिल हैं. गंगा एक्सप्रेसवे के दूसरे चरण के मंजूरी के बाद इसका विस्तार पूर्वी उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर बलिया तक हो जाता है, तो यह देश का सबसे लंबा एक्सप्रेस हो जाएगा, जिसकी लंबाई करीब 900 किमी होगी.

  • इस एक्सप्रेसवे में 292 अंडरपास, 8 RoBs, 10 फ्लाईओवर, 19 इंटरचेंज और 137 ब्रिज बनेंगे।
  • पहले फेज में यह एक्सप्रेसवे 6 लेन का होगा, जिसे 8 लेन तक बढ़ाया जा सकता है. यह मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब 555 गांवों को कवर करेगा, जो एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रियल गतिविधियों का एक हब है।
  • प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी UPEIDA ने कंस्ट्रक्शन लागत का अनुमान 23,436.88 करोड़ रुपये जताया है. इसमें भूमि अधिग्रहण की लागत अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपये है. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 39,298 करोड़ रुपये है.

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