पंचायत चुनावों में पहली बार उतरी भारतीय जनता पार्टी अति आत्मविश्वास का शिकार हो गई। साल भर से चुनावी मोड में चल रही भाजपा पर किसान आंदोलन और कोरोना का संक्रमण भारी पड़ा। केंद्र और प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद और विधायक पार्टी की नैया पार नहीं लगवा सके। हालात का अंदाजा इसी से लगाएं कि मेरठ के 33 वार्डो में भाजपा महज पांच पर जीत सकी, जबकि रालोद और बसपा को आठ-आठ सीटों पर कामयाबी मिली। दूसरी ओर बिजनौर, गाजियाबाद, शामली, बागपत समेत आसपास के कई जिलों में भी भाजपा को बड़ा झटका लगा है। ज्यादातर विधायक अपने क्षेत्रों में वोट नहीं दिला पाए। क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल का असमंजस और कार्यकर्ताओं की नाराजगी पार्टी पर भारी पड़ गई। उधर, रालोद, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सियासी जमीन जरूर बन गई।

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