Home Breaking News ठगी का आरोप, 5 साल से खुद को मृत बताकर कानून की आंखों में धूल झोंकी, कार्रवाई से बचने के लिए लिखी थी स्क्रिप्ट

ठगी का आरोप, 5 साल से खुद को मृत बताकर कानून की आंखों में धूल झोंकी, कार्रवाई से बचने के लिए लिखी थी स्क्रिप्ट

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ठगी का आरोप, 5 साल से खुद को मृत बताकर कानून की आंखों में धूल झोंकी, कार्रवाई से बचने के लिए लिखी थी स्क्रिप्ट

पांच साल तक खुद को मृत घोषित कर कानून की आंखों में धूल झोंकता रहा। हालांकि, वह कानून के लंबे हाथों से नहीं बच सका और अब उसकी साजिश का पर्दाफाश हो गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वह 30 लाख की धोखाधड़ी का आरोपी था और सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया था।Read Also:-मेरठ: पत्नी से विवाद को लेकर युवक ने लगाई फांसी, एक दिन पहले फोन कर कहा कि बस मायके में ही रहो

ये मामला था
नई बस्ती, मवाना की शकुंतला कॉलोनी निवासी नेत्रपाल ट्रक चालक है। नेत्रपाल ने अपने साथियों के साथ मिलकर 2016 में 30 लाख की ठगी की। उसने परतापुर के छज्जूपुर निवासी जीत सिंह और हरिकिशन की 8 बीघा जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर मुनेश नेहरा पत्नी विजेंद्र नेहरा निवासी कायस्थ गवड़ी परतापुर को बेच दिए। जमीन के मालिकों को इसकी जानकारी नहीं थी। बाद में धोखाधड़ी का खुलासा होने पर मुनेश की शिकायत पर 30 अप्रैल 2016 को नेत्रपाल, ब्रह्म सिंह पुत्र चंद्रकिरण, उसके दो पुत्र कुलदीप व बंटी, निवासी कायस्थ गवड़ी, हरिओम शर्मा पुत्र राजपाल शर्मा निवासी परतापुर एवं गीता पत्नी निशिकांत मोदीनगर निवासी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत कार्रवाई की गई। नेत्रपाल को छोड़कर बाकी पांच आरोपी जेल जा चुके हैं।

नेत्रपाल के परिवार ने फैलाई मौत की अफवाह
मामला दर्ज होने के बाद नेत्रपाल अंडरग्राउंड हो गया था। उसने अपना मोबाइल नंबर भी स्विच ऑफ कर लिया। परिजनों की मदद से हादसे में मौत की खबर मोहल्ले में फैल गई। बताया कि हादसे में उनकी मौत हो गई और वहीं अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद पुलिस ने सिविल लाइंस मामले में नेत्रपाल की तलाश बंद कर दी।

इस तरह पकड़ा
पुराने मामलों के निस्तारण के लिए एसएसपी मेरठ प्रभाकर चौधरी ने अभियान चलाया हुआ है। इसमें नेत्रपाल की तलाश शुरू की गई। पुलिस टीम ने यह पता लगाना शुरू किया कि मृत्यु प्रमाण पत्र है या दुर्घटना हुई है तो पंचायतनामा किया होगा। ऐसे में परिजन कोई सबूत नहीं दे सके। पुलिस को शक हुआ तो पिछले कुछ महीनों में परिवार के नंबरों पर की गई कॉलों का डाटा खंगाला गया। इनमें से एक नंबर ऐसा मिला था जिसे नेत्रपाल चला रहा था। इसके बाद आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गया।

पुलिस यही मानती रही कि वह मर चुका है, वह पूरे देश में घूमता रहा
पुलिस नेत्रपाल को मृत मान रही थी, वह बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, उड़ीसा और मध्य प्रदेश में ट्रक चला रहा था। उनकी मौत की अफवाह फैलने के बाद से पिछले पांच साल में नेत्रपाल कभी घर नहीं आया। वह नंबर बदलकर कॉल करता था। आरोपी ने नया पहचान पत्र भी बनाया था। अब आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

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