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BSP ने टिकट बंटवारे का तरीका बदला : दावेदार को बताना होगा समाज के लिए क्या किया.. इन बातों का भी देना होगा जवाब

BSP ने टिकट बंटवारे का तरीका बदला : दावेदार को बताना होगा समाज के लिए क्या किया.. इन बातों का भी देना होगा जवाब

उत्तरप्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव-2022 के लिए बहुजन समाज पार्टी ने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है। हालांकि बसपा ने इस बार टिकट बंटवारे का तरीका थोड़ा बदला है। इस बार बसपा ने  साफ सुथरे तरीके से प्रत्याशियों के चयन रणनीति अपनाई है। Read Also:-दिल्ली: मोहल्ला क्लीनिक का बदलेगा रंग रूप, जेजे कॉलोनियों और घनी आबादी वाले इलाकों में कंटेनर में बनेंगे पोर्टेबल मोहल्ला क्लीनिक

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तो कट जाएगा आलाकमान के खास का टिकट

पार्टी ने तय किया है कि पदाधिकारियों द्वारा समाज के लिए किए गए कार्यों और उनकी छवि टिकट बंटवारे में सबसे अहम रहेंगे। साफ छवि और अच्छे प्रदर्शन वाले दावेदारों को ही पार्टी चुनाव मैदान में उतारेगी। बताया जा रहा है कि उन दावेदारों का टिकट इस बार कट सकता है जो पार्टी आलाकमान के खास तो हैं, लेकिन उनकी छवि समाज में खराब है। बसपा के कई दिग्गज नेता प्रत्याशी उतारने के इस नए तरीके का ढिंढोरा पीट रहे हैं। 

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बसपा हाईकमान द्वारा आवेदन मांगे गए हैं

रअसल विधानसभा चुनाव लड़ने के दावेदारों से बसपा हाईकमान द्वारा आवेदन मांगे गए हैं। हर विभानसभा से दस आवेदन लिए जा रहे हैं। आवेदन करने वालों के बारे में विधानसभा में पड़ताल कर जानकारी जुटाई जाएगी। इसके आधार पर कमेटी और कार्यकारिणी दस दावेदारों में से सिर्फ दो का ही चयन करेगी।  फिर इन दो नेताओं की कुंडली बसपा प्रमुख मायावती के पास पहुंचेगी। अंतिम प्रत्याशी के नाम पर वहीं मुहर लगेगी। 

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सभी दावेदारों को पार्टी ने प्रोफार्मा दिया

सभी दावेदारों को पार्टी ने एक प्रोफार्मा भी बताया है। इसमें दावेदारा को अपना राजनीतिक अनुभव के साथ ही पारिवारृक पृष्ठभूमि भी बतानी होगी। यह भी बताना होगा कि उसका पेशा क्या है और समाज के लिए उसने क्या किया है। इसके अलावा दावेदार को राजनीति में आने की वजह, बसपा के मिशन मूवमेंट में योगदान, बसपा से जुड़ाव, किस विधानसभा से टिकट चाहिए और वहां किए गए सभी विकास कार्य एवं सामाजिक कार्यों का ब्यौरा भी देना होगा।

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चुनावी खर्च में भी पार्टी मदद करेगी

पुरानी गलतियों को सुधारते हुए बसपा इस बार पारदर्शी छवि के लोकप्रिय नेताओं को ही चुनावी मैदान में उतारना चाहती है। इतना ही नहीं इस बार पार्टी ने तय किया है कि यदि बसपा का कोई नेता बेहतर छवि का है, वह मजबूत प्रत्याशी हो सकता है, लेकिन वह आर्थिक रूप से कमजोर है तो पार्टी उसे ही प्रत्याशी बनाएगी और उसके चुनावी खर्च भी पार्टी मदद करेगी। 

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सत्येंद्र जैन ने कहा कि हमने शिपिंग कंटेनरों में मॉड्यूलर ‘मोहल्ला क्लीनिक’ बनाए हैं। उन्होंने कहा कि क्लिनिक बनाने में 3-5 महीने लगते हैं, जबकि इसे बनने में काफी कम समय लगता है। इसे एक फैक्ट्री में बनाया जाता है। यह काफी मजबूत और पोर्टेबल है। हमने ट्रायल के उद्देश्य से 2 ऐसे क्लीनिक स्थापित किए हैं।

आपको बता दें कि मोहल्ला क्लीनिक दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए केजरीवाल सरकार की प्रमुख पहलों में से एक है। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली में COVID-19 महामारी से दो महीने पहले जनवरी 2020 में 152 मोहल्ला क्लीनिकों का उद्घाटन किया।

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