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74 साल पहले माउंटबेटन के प्लान को कांग्रेस ने दी थी मंजूरी, इसी से भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना

74 साल पहले माउंटबेटन के प्लान को कांग्रेस ने दी थी मंजूरी, इसी से भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना

भारत की आजादी से एक दिन पहले 14 अगस्त 1947 (आज से ठीक 74 साल पहले) को पाकिस्तान एक नया मुल्क बना। 3 जून 1947 को वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत के दो हिस्से करके भारत और पाकिस्तान बनाने का ऐलान किया था।

15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, लेकिन इस आजादी के साथ ही भारत का बंटवारा भी हुआ। भारत की आजादी से एक दिन पहले 14 अगस्त 1947 (आज से ठीक 74 साल पहले ) को पाकिस्तान एक नया मुल्क बना। 3 जून 1947 को वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत के दो हिस्से करके भारत और पाकिस्तान बनाने का ऐलान किया था। इस बंटवारे ने लाखों लोगों को अपने ही देश में शरणार्थी बना दिया। कहा जाता है कि इस दौरान करीब सवा करोड़ लोग विस्थापित हुए। इतिहास में किसी राजनीतिक कारण से होने वाला ये सबसे बड़ा विस्थापन था। बंटवारे के दौरान हुए दंगों में लाखों लोग मारे गए।

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दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद एक तरफ देश में आजादी के लिए आवाजें बुलंद होने लगी थीं, वहीं दूसरी तरफ मजहबी ताकतें भी सिर उठाने लगी थीं। जगह-जगह सांप्रदायिक दंगे होने लगे थे। देश में उथल-पुथल का माहौल था। आखिरकार फरवरी 1947 में ब्रिटिश सरकार ने भारत को आजाद करने का ऐलान किया, जिसकी जिम्मेदारी भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को सौंपी गई।

माउंटबेटन एक योजना लेकर आए जिसके तहत उन्होंने प्रस्ताव दिया कि प्रांतों को स्वतंत्र उत्तराधिकारी राज्य घोषित किया जाए और फिर उन्हें यह चुनने की अनुमति दी जाए कि उन्हें संविधान सभा में शामिल होना है या नहीं। इस योजना को ‘डिकी बर्ड प्लान’ कहा गया। जवाहरलाल नेहरू ने इस प्लान का विरोध किया और कहा कि इससे देश टुकड़ो में बंट जाएगा और अराजकता का माहौल पैदा होगा। ये अप्रैल 1947 की बात है।

इसके बाद माउंटबेटन ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के नेताओं के साथ लंबे विचार-विमर्श के बाद 3 जून 1947 को भारत को दो देशों में विभाजित करने की योजना का खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीतिक समस्या का समाधान करने के लिए विभाजन ही आखिरी विकल्प है।

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प्लान में कहा गया कि भारत को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटकर दो देश बनाए जाएंगे। एक भारत और दूसरा पाकिस्तान। दोनों देशों का अलग संविधान होगा और अलग संविधान सभा का गठन किया जाएगा। भारत की रियासतों को छूट दी गई कि वो अपनी मर्जी से या तो पाकिस्तान का हिस्सा बन जाएं या भारत में रहें। दोनों में नहीं मिलना है तो स्वतंत्र भी रह सकती हैं। माउंटबेटन इस प्लान को कांग्रेस के पास ले गए जिसे कांग्रेस ने अपनी मंजूरी दी और इसी के साथ ये तय हो गया कि भारत का बंटवारा होगा। 18 जुलाई 1947 के दिन ब्रिटिश पार्लियामेंट ने इस प्लान को पारित कर दिया। माउंटबेटन प्लान से भारत को आजादी तो मिली, लेकिन इसके साथ ही कश्मीर जैसी जटिल समस्या भी पैदा हो गई जो आज भी दोनों देशों में विवाद की एक बड़ी वजह है।

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