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EOS-03 की लॉन्चिंग फेल : तकनीकी खामी से ISRO GSLV-F10 मिशन में आई अड़चन

EOS-03 की लॉन्चिंग फेल : तकनीकी खामी से ISRO GSLV-F10 मिशन में आई अड़चन

EOD-03 का लॉन्च भी तकनीकी वजहों और कोरोना के चलते पहले 3 बार टल चुका था। अब इसके फेल होने के बाद इसरो लॉन्च की नई तारीख का ऐलान जल्द करेगा।

आसमान से धरती की निगरानी के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा की गई अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट, EOS-03 की लॉन्चिंग तकनीकि कारणों से असफल हो गई। ISRO ने बताया कि क्रायोजेनिक चरण में एक तकनीकि खामी के कारण मिशन ”पूरी तरह से पूरा नहीं किया जा सका।” EOD-03 का लॉन्च भी तकनीकी वजहों और कोरोना के चलते पहले 3 बार टल चुका था। अब इसके फेल होने के बाद इसरो लॉन्च की नई तारीख का ऐलान जल्द करेगा।

अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-03) ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से आज सुबह 5.43 बजे उड़ान तो भरी, लेकिन तीसरे स्टेज (क्रायोजेनिक इंजन) में गड़बड़ी आने से यह ऑर्बिट में स्थापित नहीं हो सका। तकनीकी दिक्कतों के चलते मिशन कंट्रोल सेंटर को सिग्नल और डेटा मिलने बंद हो गए थे। इसरो के चेयरमैन के सिवन ने बताया कि “GSLV-F10  उद्देश्य के अनुसार मिशन को पूरा नहीं किया जा सका।”

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EOS-03 एक अत्याधुनिक फुर्तीली अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है जिसे GSLV-F10 द्वारा जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में रखा जाना था। इसके बाद, उपग्रह अपने ऑनबोर्ड प्रोपल्सन सिस्टम का उपयोग करके अंतिम भूस्थिर कक्षा ( Geostationary orbit) में पहुंच जाता। अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट की मुख्य विशेषता यह है कि यह चिन्हित किए गए किसी बड़े क्षेत्र क्षेत्र की वास्तविक समय की छवियां लगातार अंतराल पर भेजता रहेगा। इस सैटेलाइट को ‘आई इन द स्काय’ यानी आसमान में आंख कहा जा रहा था।

क्या है अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट?
इस सैटेलाइट को जियो इमेजिंग सैटेलाइट-1 (GISAT-1) भी कहा जा रहा है। इसके जरिए भारत के साथ-साथ चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर भी नजर रखी जा सकेगी। अंतरिक्ष विभाग के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने हाल ही में राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-03) पूरे देश की रोज 4-5 तस्वीरें भेजेगा। इस सैटेलाइट की मदद से जलाशयों, फसलों, तूफान, बाढ़ और फॉरेस्ट कवर में होने वाले बदलावों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी।

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यह बड़े इलाके की रियल-टाइम इन्फॉर्मेशन देने में सक्षम है। यह बेहद खास है, क्योंकि अन्य रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट्स लोअर ऑर्बिट्स में हैं और वे नियमित इंटरवल के बाद एक स्पॉट पर लौटते हैं। इसके मुकाबले EOS-03 रोज चार-पांच बार देश की तस्वीर खींचेगा और विभिन्न एजेंसियों को मौसम और जलवायु परिवर्तन से संबंधित डेटा भेजेगा।

इससे प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ किसी भी तरह की अल्पकालिक घटनाओं की त्वरित निगरानी में मदद मिल सकती है। यह उपग्रह कृषि, वानिकी, जल निकायों के साथ-साथ आपदा चेतावनी, चक्रवात निगरानी, बादल फटने या आंधी-तूफान की निगरानी सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोग लाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी देने वाला है।

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