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बायोमेट्रिक मशीन फर्जीवाड़ा: करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले में तत्कालीन डीएसओ की गर्दन फंसी

बायोमेट्रिक मशीनों में फर्जीवाड़ा कर गरीबों के हिस्से का करोड़ो का राशन हड़प किए जाने के मामले में तत्कालीन डीएसओ सुनील कुमार पुष्कर की गर्दन भी फंसती जा रही है। घोटाले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने साक्ष्य मिलने पर प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर तत्कालीन डीएसओ सहित कई पूर्ति निरीक्षकों को मामले में आरोपित बनाए जाने की अनुमति मांगी है।

बायोमेट्रिक मशीन में फर्जीवाड़ा कर जिले के नगरीय क्षेत्रों में 64 से अधिक आधार कार्ड नंबरों को 19795 से अधिक बार प्रयोग कर पात्रों के हिस्से का करोड़ो का खाद्यान्न उठा लिया गया था। वर्ष 2018 में प्रकाश में आए इस खाद्यान्न घोटाले पर जागे जिला पूर्ति विभाग ने नगरीय क्षेत्रों के सात थानों में 13 मुकदमे दर्ज कराए थे। जिसके बाद मामले की जांच क्राइम ब्रांच के सुपुर्द कर दी गई थी। विवेचना कर रही क्राइम ब्रांच के सामने घोटालेबाजों के विरुद्ध् साक्ष्य जुटाने में सबसे बड़ी मुश्किल आधार कार्ड ङ्क्षलक खोलने में आ रही थी, लेकिन हाईकोर्ट के दिशा निर्देश के बाद क्राइम ब्रांच की विवेचना ने गति पकड़ ली। क्राइम ब्रांच ने अब तत्कालीन डीएसओ सुनील कुमार पुष्कर, तत्कालीन क्षेत्रीय पूर्ति अधिकारी जगबीर ङ्क्षसह तथा पूर्ति निरीक्षक मोहिनी मिश्रा को मुकदमों में आरोपित बनाने की अनुमति शासन से मांगी है।

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