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जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को भारत की मंजूरी, कोरोना के गंभीर लक्षणों पर 85% प्रभावी

जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को भारत की मंजूरी, कोरोना के गंभीर लक्षणों पर 85% प्रभावी

कोरोना की तीसरी लहर की आहट के बीच एक राहत देने वाली खबर सामने आई है। भारत सरकार ने जॉनसन एंड जॉनसन की सिंग डोज एंटी कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो यह अमेरिकी वैक्सीन इसी महीने के अंत तक भारत में उपलब्ध होगी। भारत में मंजूरी पाने वाली यह पांचवी वैक्सीन है। 

जॉनसन एंड जॉनसन की इस वैक्सीन की कीमत भारत में 2100 रुपये के करीब हो सकती है।इससे पहले सीरम इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड, हैदराबाद के भारत बायोटेक की कोवैक्सिन, रूस की स्पूतनिक-V और अमेरिका की मॉडर्ना को भारत सरकार की मंजूरी मिल चुकी है, हालांकि मॉर्डना की वैक्सीन अभी भारत में उपलब्ध नहीं हुई है। 

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स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शनिवार को सोशल मीडिया पर बताया कि जॉनसन एंड जॉनसन ने शुक्रवार को ही इमरजेंसी अप्रूवल के लिए आवेदन किया था और उस दिन ही ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इसकी मंजूरी दे दी। ये वैक्सीन अमेरिका समेत कई देशों में इस्तेमाल हो रही है। यह कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचाने में 85% तक कारगर साबित हुई है।

जॉनसन एंड जॉनसन की इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत है कि ये सिंगल डोज वैक्सीन है, यानि इसका एक ही टीका कोरोना से बचाव के लिए कारगर है। वहीं इस वैक्सीन में ऐसे फॉर्मूले का इस्तेमाल हुआ है, जिसके दूसरे बीमारियों से लड़ने में रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है। बड़ी बात यह है कि इस वैक्सीन को फ्रीजर में रखने की भी जरूरत नहीं है। इस वैक्सीन को 20 डिग्री सेल्सियस पर 2 साल तक स्टोर किया जा सकता है, जबकि 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 3 महीने स्टोर कर सकते हैं।

इतिहास में कभी भी वैक्सीन टेस्टिंग और निर्माण इतनी तेजी से नहीं हुआ। ट्रायल्स में J&J की वैक्सीन 66% इफेक्टिव साबित हुई है। भारत में प्रोडक्शन के लिए J&J ने हैदराबाद की कंपनी बायोलॉजिकल E से करार किया है।  इस वैक्सीन को WHO भी अप्रूव कर चुका है और फिलहाल 59 देशों में इसे इस्तेमाल किया जा रहा है।

जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन जैनसन (Ad26.COV2.S) एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है। इसमें सेल तक एंटीजन को पहुंचाने के लिए एक वायरस का इस्तेमाल किया जाता है यानि कोरोनावायरस के जीन को एडीनोवायरस में मिलाकर वैक्सीन बनी है। हालांकि यह वायरस इतना ताकतवर नहीं होता कि किसी मनुष्य को संक्रमित कर सके। जब यह वैक्सीन मनुष्य के शरीर में पहुंचती है तो इसके सेल हमारे शरीर में स्पाइक प्रोटीन्स बनाते हैं। यही प्रोटीन कोरोना वायरस से लड़ने में इम्यून सिस्टम की मदद करते हैं। जॉनसन एंड जॉनसन ने इसी तरह इबोला की वैक्सीन भी बनाई थी।

वैक्सीनकीमत
कोविशील्ड780 (150 रुपये सविर्स चार्ज+30 रुपये जीएटी मिलाकर)
कोवैक्सीन1410 (150 रुपये सविर्स चार्ज+60 रुपये जीएटी मिलाकर)
स्पूतनिक वी1145 (150 रुपये सविर्स चार्ज+47 रुपये जीएटी मिलाकर)
माॅर्डना2300-2700
जॉनसन एंड जॉनसन2100

क्या कहते हैं ट्रायल्स के नतीजे?

वैक्सीन ने अपने पहले फेज के ट्रायल अमेरिका, जापान, नीदरलैंड और बेल्जियम में किए थे। इसके बाद हर फेज में ट्रायल के दायरे को और बढ़ाया गया। तीसरे फेज में कंपनी ने 17 देशों में वैक्सीन के ट्रायल किए थे। 40 हजार से ज्यादा लोगों पर किए गए क्लिनिकल ट्रायल में वैक्सीन की ओवरऑल एफिकेसी 66% पाई गई थी। साथ ही हॉस्पिटलाइजेशन से रोकने में भी वैक्सीन 85% कारगर है। J&J वैक्सीन लेने के 4 हफ्ते बाद कोरोना से संक्रमित लोगों में किसी को भी हॉस्पिटलाइज नहीं किया गया था।

कंपनी ने अप्रैल में भारत में क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए आवेदन किया था। लेकिन भारत सरकार ने अमेरिका, जापान,यूरोप, WHO द्वारा अप्रूव्ड और प्रतिष्ठित वैक्सीन निर्माता कंपनियों द्वारा बनाई जा रही वैक्सीन को भारत में क्लिनिकल ट्रायल से छूट दी है। हालांकि, भारत में पहले वैक्सीन 100 लोगों को दी जाएगी और 7 दिनों तक इन लोगों की निगरानी की जाएगी। इन 7 दिनों के दौरान किसी तरह के साइड इफेक्ट न होने पर वैक्सीन सभी लोगों की दी जा सकेगी।

जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को भारत की मंजूरी, कोरोना के गंभीर लक्षणों पर 85% प्रभावी
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