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काबुल पर किसी भी वक्त हो सकता है तालिबान का कब्जा, महज 11 किलोमीटर की दूरी बाकी

काबुल पर किसी भी वक्त हो सकता है तालिबान का कब्जा, महज 11 किलोमीटर की दूरी बाकी

तालिबानी लड़ाके अब तक देश की 17 प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर चुके हैं, सिर्फ काबुल पर कब्जा करना बाकी है। तालिबान लोगार तक आ चुका है, जहां से काबुल पहुंचने में महज डेढ़ घंटा लगता है।

अफगानिस्तान से बड़ी खबर सामने आ रही है। समाचार एजेंसी एपी ने दावा किया है कि तालिबान अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से महज 11 किलोमीटर दूरी पर है। जल्द ही काबुल पर भी तालिबान का कब्जा हो सकता है। तालिबानी लड़ाके अब तक देश की 17 प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर चुके हैं, सिर्फ काबुल पर कब्जा करना बाकी है। तालिबान लोगार तक आ चुका है, जहां से काबुल पहुंचने में महज डेढ़ घंटा लगता है।

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तालिबान ने अफगानिस्तान सरकार और सेना के सबसे मजबूत गढ़ मजार-ए-शरीफ को भी गिरा दिया है। माजर पर ही अफगान सरकार की सारी उम्मीदे टिकी थीं, क्योंकि मजार-ए-शरीफ बल्ख प्रांत की राजधानी और सरकार समर्थक बलों का आखिरी गढ़ भी था।

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उधर ब्रिटेन और अमेरिका की सेना के बाद अब ऑस्ट्रेलिया की सेना की टुकड़ी भी काबुल पहुंचने वाली है। ये सेनाएं अपने देश के नागरिकों को सुरक्षित वापस ले जाने आ रही हैं। इससे पहले शनिवार को तालिबान ने पक्तिका  और कुनार प्रांत की राजधानियों पर कब्जा कर लिया।

तालिबान का दावा है  उसने काबुल को चारों तरफ से घेर लिया है। पूर्व में वो खाक जबर के पास है, जो काबुल प्रांत का ही एक जिला है। पश्चिम में वो अरघंडी में है, जो काबुल के शहरी इलाके से लगा है। उत्तर में वो काराबाग में है, जो काबुल प्रांत का एक जिला है। दक्षिण में वो चार असयाब में है, जो काबुल का एक जिला है। तालिबान अब कुछ दिन में ही काबुल पर कब्जा कर सकता है।

ऐसे में सरकारी सुरक्षा बलों ने काबुल की सुरक्षा की तैयारी और तेज कर दी है। जनरल समी सादाद को काबुल की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को पाकिस्तान जा रहा है, जहां से वो वार्ता के बाद दोहा जाएगा। यहां सरकार और तालिबान के बीच हाेने वाली बातचीत पर ही काबुल का भविष्य टिका है।

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तालिबानियों ने सरकारी हेलीकॉप्टर का ट्रायल किया
तालिबान से जुड़े लोगों ने कुछ वीडियो शेयर किया है। दावा किया जा रहा है कि तालिबान ने कंधार एयरपोर्ट पर कब्जे में आए हेलीकॉप्टर की ट्रायल उड़ान की है। ये शायद पहली बार है जब तालिबान ने हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं।तालिबान का दावा है कि उसके पास उड़ने की हालत में दो MI-17 हेलीकॉप्टर हैं। इस बीच तालिबानी सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि अफगान सैनिक अपनी जान बचाकर ईरान भाग रहे हैं।

तालिबान के इस तरह बढ़ने के बीच राष्ट्रपति अशरफ गनी ने राष्ट्रीय टीवी पर लोगों को संबोधित किया और कहा कि वह अफगान लोगों पर किसी को युद्ध नहीं थोपने देंगे। उन्होंने पद छोड़ने या इस्तीफा देने का कोई ज़क्र नहीं किया। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि अफगानी नेताओं को खुद अपने देश के लिए लड़ना होगा।

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तालिबान के सामने पस्त हो रही हैं सरकारी सेना

अमेरिकी सेना की टुकड़ियां अपने राजनयिक और कर्मचारियों को देश से बाहर ले जाने के लिए वहां पहुंच रही हैं दूसरे कई देश भी अपने दूतावास में मौजूद कर्मचारियों को लेकर चिंतित हैं और उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश में हैं। हालांकि तालिबान ने कहा है कि वह राजनयिकों और दूतावासों पर हमले नहीं करेगा. तालिबान ने देश दूसरे और तीसरे सबसे बड़े शहरों पर शुक्रवार को कब्जा कर लिया. सरकारी सुरक्षाबल तालिबान के लड़ाकों का मुकाबला नहीं कर पाए और अब कयास लगाया जा रहा है कि तालिबान कभी भी काबुल पर कब्जा कर लेगा।

एक हजार लोगों की मौत, ढाई लाख बेघरबार

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, बीते एक महीने में अफगानिस्तान में एक हजार से ज्यादा आम नागरिकों की की मौत हुई है। बीबीसी न्यूज के मुताबिक तालिबान ने पिछले कुछ दिनों में मीडिया चीफ समेत कई राजनीतिक हत्याओं को भी अंजाम दिया है। अभी तक ढाई लोग अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हो चुके हैं. अमेरिकी सेना 20 साल बाद देश छोड़कर जा रही है, जिसके कारण तालिबान का दबदबा बढ़ रहा है और आशंका जताई जा रही है कि साल 2001 में सेना के आने के बाद मानवाधिकारों को लेकर जो सुधार हुए थे, वो सब खत्म हो जाएंगे. इस बीच तालिबान  प्रवक्ता मुहम्मद सुहैल शाहीन ने भारत की विकास परियोजनाओं की तारीफ की है। शाहीन ने कहा कि तालिबान सोचता है कि यह कदम प्रशंसनीय है, लेकिन भारत अगर अफगानिस्तान में सैन्य मौजूदगी चाहता है तो यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा।

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