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फर्जीवाड़ा करने में लगे अधिकारी, 400 करोड़ के प्लांट से भरी जा रही जेब

मेरठ शहर में जलापूर्ति के लिए 400 करोड़ रुपये की पेयजल योजना नगर निगम और जल निगम के अधिकारियों की जेब भरने का जरिया बन गई है। 2016-17 में जेएनएनयूआरएम योजना के तहत भोला की झाल पर बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की देखरेख पर हर माह 27 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि महापौर और जलकल विभाग के जीएम के निरीक्षण में प्लांट तमाम खामियों के साथ ही जर्जर हालत में मिला। यही नहीं, जीएम ने हर माह के भुगतान पर रोक लगाते हुए जल निगम के संयुक्त निरीक्षण के बाद ही इसे जारी करने को कहा था।

बाद में जीएम जलकल दो अक्तूबर को छुट्टी पर चले गए। उनकी अनुपस्थिति में सहायक अभियंता अशोक कुमार ने अकेले ही प्लांट का निरीक्षण कर लिया। पांच अक्तूबर को नगर आयुक्त को भेजे गए पत्र में महापौर और जीएम जलकल के निरीक्षण में मिली अनियमितताओं का निरीक्षण करके ओके की रिपोर्ट देते हुए जल निगम को 81.50 लाख रुपये का भुगतान करने की संस्तुति कर दी।

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