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छत्तीसगढ़: युवाओं ने तैयार की गोबर की पुट्टी, घर के अंदर सर्दी-गर्मी की छुट्टी, शोध को पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू

किसी व्यक्ति के आसपास का वातावरण उसके भविष्य निर्माण में बड़ी भूमिका निभाता है। छत्तीसगढ़ योजना आयोग के मार्गदर्शन में कार्य कर रहे सहायक शोधार्थी (कोविड सेल) अभय दुबे और उनके सहयोगी चिकित्सक (बीडीएस) डा. पुरुषोत्तम सिंह भी गांव में घरों और दीवारों की गोबर-मिट्टी से होती लिपाई-पुताई को देखते हुए बड़े हुए और यही उनके लिए शोध और नवाचार का विषय भी बन गया।छत्तीसगढ़: युवाओं ने तैयार की गोबर की पुट्टी, घर के अंदर सर्दी-गर्मी की छुट्टी, शोध को पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरूदोनों युवाओं ने गोबर, पीली मिट्टी, चूना और जिप्सम को मिलाकर एक खास तरह की पुट्टी तैयार की है, जो कमरे का तापमान पांच से दस डिग्री तक नियंत्रित करने में सक्षम है। खर्च भी रासायनिक पुट्टी के मुकाबले एक तिहाई ही आता है। राज्य खादी ग्रामोद्योग विभाग ने ‘वोकल फार लोकल’ के तहत इस उत्पाद को अपनाया है।छत्तीसगढ़: युवाओं ने तैयार की गोबर की पुट्टी, घर के अंदर सर्दी-गर्मी की छुट्टी, शोध को पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरूअमेरिकी विश्वविद्यालयों के शोध कार्यो से जुड़े रायपुर के पं. रविशंकर विश्वविद्यालय में रसायनशास्त्र के प्रोफेसर डा. शम्स परवेज ने बताया कि गोबर और मिट्टी के मेल से बनने वाले लेप में ऐसे रासायनिक गुण विकसित हो जाते हैं, जो घरों को ठंडा रखने में सक्षम होते हैं। जिप्सम इंसुलेटर का काम करता है, जो अंदर के तापमान को बाहरी तापमान के प्रभाव से बचाता है। चूना रोशनी को परिवर्तित कर देता है। चारों तत्व मिलकर कमरे के तापमान को नियंत्रित रखते हैं। अभय ने बताया कि यूनिसेफ की सहायता से किए गए उनके शोध को पेटेंट के लिए राज्य खादी ग्रामोद्योग विभाग ने आवेदन भी कर दिया है।

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