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हवा में धुएं से दोगुनी धूल, सांस रही फूल, जानें-किन हालातों में मेरठ बन रहा गैस चेंबर

तापमान गिरने से पहले ही एनसीआर की हवा में घुटन बढ़ने लगी है। मेरठ को गैस चेंबर बनने के लिए छोड़ दिया गया है। लाकडाउन के दौरान साफ हुई हवा अब जहरीली होने लगी है। मेरठ की सड़कों को उखाड़कर छोड़ दिया गया है, जिससे हवा में पीएम-2.5 की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ेगी। नगर में कूड़ा जलाने और औद्योगिक गतिविधियों से उत्सर्जति धुएं का असर दिखने लगा है, लेकिन यहां की हवा में सबसे ज्यादा धूलकण हैं। डाक्टरों ने आगाह किया है कि वायु प्रदूषण से सिकुड़ रहे फेफड़ों को कोरोना संक्रमण के दौरान निमोनिया जल्द पकड़ेगा।

केंद्रीय पर्यावरण विभाग ने 52 टीमों का गठन किया है, जो नई दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, मेरठ, हापुड़, बागपत एवं मुजफ्फरनगर में प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाएंगी। सर्दियों में मेरठ का पीएम-2.5 का स्तर पांच सौ माइक्रोग्राम तक पहुंच जाता है। जिले में तीन स्थानों पर वायु प्रदूषण मापक यंत्र लगाए गए हैं। यहां पुरानी बसों-ट्रकों का संचालन हो रहा।

आटो, बाइक, ट्रैक्टर, गुड़ बनाने के लिए ईंधन, डीजल वाहन, पुराने जेनसेट एवं औद्योगिक चिमनयों से बड़ी मात्र में खतरनाक कण वायुमंडल में पहुंच रहे हैं। मेरठ में परतापुर, रिठानी, उद्योगपुरम, मोहकमपुर, बागपत रोड व मवाना रोड स्थित इंडस्टियल एरिया को सर्वाधिक प्रदूषित माना जाता है। इधर, उखड़ी सड़कों से धूलकणों का गुबार बढ़ा है। भवन निर्माण कार्य एवं मिट्टी खनन से भी बड़ी मात्र में धूलकण हवा में पहुंचे। सर्दियों में वायुदाब बढ़ने पर हवा के ऊपरी परत में जमा ये धूलकण अब नीचे आ रहे हैं। इसी वजह से पीएम-2.5 की मात्रा तेजी से बढ़ी है।

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