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तालिबान की भारत को खुली चेतावनी- ‘अफगानिस्तान में सेना भेजी तो अच्छा नहीं होगा’

तालिबान की भारत को खुली चेतावनी- ‘अफगानिस्तान में सेना भेजी तो अच्छा नहीं होगा’

तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि अफगान के लोगों या राष्ट्रीय परियोजनाओं को लेकर भारत ने जो मदद की है मुझे लगता है कि वह तारीफ के काबिल है।

अफगानिस्तान में तेजी से अपना दायरा बढ़ा रहे तालिबान (Taliban) ने भारत (India) को चेतावनी दी है विद्रोही संगठन के प्रवक्ता ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा है कि भारत को अफगानिस्तान में सैन्य मौजूदगी से बचना चाहिए। अगर भारत ने अफगानिस्तान में मिलिट्री भेजी तो अच्छा नहीं होगा। Read Also : अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कांधार पर तालिबान का कब्जा, काबुल अब सिर्फ 150 किमी दूर

दरअसल, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस समेत कई देश अफगानिस्तान में बिगड़ती स्थिति को लेकर लगातार चर्चा कर रहे हैं। इसके अलावा भारत ने अपने नागरिकों को भी जल्द से जल्द अफगानिस्तान से निकलने की सलाह दी है। भारत भी दो टूक कह चुका है अफगानिस्तान में ताकत के बल पर बनी सरकार को मान्यता नहीं देंगे। भारत के अलावा जर्मनी, कतर, तुर्की और कई अन्य देशों ने तालिबान से अफगानिस्तान में हिंसा और हमले तुरंत रोकने की अपील की है।

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तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि भारत अगर अफगानिस्तान में सैन्य दखल देता है और यहां उसकी उपस्थिति होती है, तो यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा। उन्होंने अफगानिस्तान में दूसरे देशों के सैन्य उपस्थिति की हालत देखी, तो यह उनके लिए एक खुली किताब है। तालिबान अफगानिस्तान के बड़े हिस्से पर अपना कब्जा कर चुका है। हाल ही में उसने करीब 34 प्रांतीय राजधानियों को अपने काबू में कर लिया है, तालिबान अब काबुल एयरपोर्ट से भी महज एक घंटे की दूरी पर है।

तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि अफगान के लोगों या राष्ट्रीय परियोजनाओं को लेकर भारत ने जो मदद की है मुझे लगता है कि वह तारीफ के काबिल है। उन्होंने कहा, ‘डैम, नेशनल प्रोजेक्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और कुछ भी जो अफगानिस्तान के विकास, इसके दोबारा निर्माण, आर्थिक समृद्धि और अफगानिस्तान के लोगों के लिए किए गए कामों की सराहना करते हैं।

हिंदू और सिख समुदाय की सुरक्षा और पक्तिया प्रांत में हुए गुरुद्वारा वाले मामले पर शाहीन ने कहा, ‘वहां पर झंडा सिख समुदाय ने खुद हटाया था। जब मीडिया में खबरें आई थीं, तो हमने पक्तिया प्रांत में अपने अधिकारियों से बात की और उन्हें इसके बारे में बताया। इसके बाद हमारे सुरक्षा बलों ने गुरुद्वारा पहुंचकर परेशानी के बारे में पूछा।’ उन्होंने कहा है कि समुदाय अपने धार्मिक कार्यक्रम कर सकता है। सिख समुदाय ने हमारे अधिकारियों से कहा कि कोई झंडे को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन हमने उन्हें भरोसा दिया कि ऐसा कुछ नहीं होगा तो उन्होंने झंडा फिर से लगा दिया।

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तालिबान का दावा- दूसरे देशों के दूतावासों को खतरा नहीं
तालिबान प्रवक्ता मोहम्मद सुहैल शाहीन ने दावा किया है कि दूसरे देशों के दूतावासों और अधिकारियों को तालिबान से कोई खतरा नहीं है। ये बात हम कई बार कह चुके हैं और ये हमारा वादा है। तालिबान प्रवक्ता ने भारतीय डेलिगेशन से बातचीत की रिपोर्ट्स की पुष्टि नहीं की है। उसने कहा है कि बीते दिन दोहा में हुई एक मीटिंग में भारतीय डेलिगेशन जरूर शामिल था, लेकिन अलग से हमारी कोई मीटिंग नहीं हुई है।

तालिबान प्रवक्ता से जब पूछा गया कि क्या ये भरोसा दे सकते हैं कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होगा। इसके जवाब में उसने कहा कि हम इस बात के लिए वचनबद्ध (कमिटेड) हैं कि अफगानी जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ नहीं होने देंगे। तालिबान प्रवक्ता ने पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से गहरे रिश्तों की बात को गलत बताया है। उसका कहना है कि ये आरोप सिर्फ कुछ तय नीतियों और राजनीति लक्ष्यों की वजह से लगाए जाते हैं।

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काबुल से महज एक घंटे की दूरी पर है तालिबान
तालिबान ने दावा किया है कि उसने शनिवार सुबह पक्तिया प्रांत की राजधानी शरना को भी कब्जे में ले लिया है। यहां पर भारी हथियार बरामद किए गए हैं। तालिबान काबुल एयरपोर्ट के अब महज एक घंटे की दूरी पर है। आशंका है कि तालिबान यहां कोई हमला कर सकता है। दो दिन पहले तक कयास लगाए जा रहे थे कि तालिबान को काबुल पहुंचने में 90 दिन लगेंगे, लेकिन वह काफी तेजी से आगे बढ़ते हुए अब काबुल पर कब्जा करने के करीब है।

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