स्वास्थ्य हेतु आवश्यक हैं हल्दी व हींग !

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हल्दी में विटामिन ए, बी, सी, पाए जाते हैैं। यह गर्म, वात, पित्त व कफ को दूर करने वाली होती है। जुकाम, कुष्ठ, गठिया और चर्मरोगों को दूर करने वाली होती है। यह चोट, सूजन, फोड़ा और हड्डी के टूटने को ठीक करने वाली होती है। हल्दी के एक टुकड़े को भूनकर दांत के नीचे दबाने से दांत का दर्द बंद हो जाता है।

हल्दी के उबटन से वर्ण सुन्दर और कान्तिमय होता है। हल्दी, चूना और शहद समभाग लेकर इन तीनों को खूब अच्छी तरह से मिलाकर दर्द के स्थान पर लगाने से गठिया की सूजन में लाभ प्राप्त होता है अथवा हल्दी के पत्ते को सेंककर बांधने से गठिया की सूजन और दर्द में हितकारी होता है।

हल्दी के टुकड़े को सेंककर रात में सोते समय मुंह में रखने से जुकाम, कफ और खांसी में लाभ होता है। हल्दी की गांठ को घी में सेंककर चूर्ण बनाकर चीनी में मिलाकर कुछ दिनों तक प्रतिदिन खाने से मधुमेह के रोग तथा अन्य प्रमेह रोगों में लाभ मिलता है।

हल्दी और चीनी पानी में मिलाकर पिलाने से मूर्छा रोग ठीक होता है। हल्दी में चूना मिलाकर (अन्दरूनी चोट) की सूजन-लेप करने से सूजन ठीक हो जाता है। हल्दी के धुएं का नस्य लेने से सर्दी और जुकाम में तुरन्त लाभ मिलता है।
हल्दी को थोड़े से पानी में पीसकर, गर्म करके बिच्छू या किसी भी जन्तु के डंक  पर लेप करने से लाभ मिलता है। जिगर के रोगी को हल्दी हानिप्रद होती है।

हींग: हींग गर्म, तीक्ष्ण, वात, कफ और शूल को नष्ट करती है और पित्त प्रकोपक होती है। यह रस में कटु और उष्ण वीर्य होती है तथा भोजन पचाने में लाभदायक होती है। भोजन में रूचि उत्पन्न करती है। हींग को गूलर के सूखे फलों के साथ खरल करके खाने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है। हींग को सौंफ के अर्क में देने में मूत्रावरोध में लाभ होता है।

हींग को पानी में घोलकर नाक में उसकी बूंदें डालने से आधासीसी रोग में आराम मिलता है। हींग को पानी में उबालकर इस पानी से कुल्ले करने से दांत का दर्द दूर होता है अथवा दांतों के पीले भाग में हींग भरने से दंतकृमि नष्ट हो जाते हैं और दांत की पीड़ा मिट जाती है।

हींग के सेवन से स्त्री की योनि गर्भाशय की शुद्धि होती है, मासिक धर्म साफ और समय से होने लगता है, उदर-वेदना को मिटाता है। निम्न चूर्ण को बनाकर सेवन करने से अनेक रोगों में लाभ देने वाला होता है:-
घी में सेंकी हुई हींग, सोंठ और कालीमिर्च, पीपर, सेंधा नमक, अजवाइन, जीरा सफेद और शाह जीरा को समभाग में लेकर इन आठों वस्तुओं को एक साथ मिलाकर, चूर्ण बनाकर मजबूत ढक्कन वाली बोतल में भर कर रख दें। थोड़ा चूर्ण भोजन से पूर्व खाने से अजीर्ण, वायु, हैजा, पेट दर्द आदि रोगों को यह चूर्ण ठीक कर देता है।

स्त्री को मिर्गी आती हो तो कुछ दिनों तक दो तोले की मात्रा में शुद्ध हींग का अर्क पीने से ठीक हो जाता है। गर्म पानी के साथ मटर के बराबर हींग निगल जाने से उदरशूल, अतिसार, हिचकी और उल्टी में शीघ्र आराम हो जाता है। कब्जियत के पुराने रोगियों के लिए हींग का सेवन लाभकारक होता है। पेट में खूब अफारा हो जाने के कारण पेट फूल गया हो, पेट में दर्द होता हो तो हींग को थोड़े से पानी में मिलाकर नाभि के आसपास और पेट पर इन का लेप करने से कुछ ही क्षणों में आराम हो जाता है।

बच्चों के पेट में मरोड़ हो रहा हो तो इनके भी नाभि के ऊपर हींग का लेप लगा देने से बच्चे को आराम मिल जाता है। हींग को शहद में मिलाकर, रूई की बत्ती बनाकर, सुलगाकर इनका काजल बनाकर दोनों आंखों पर लगाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और आंखों के रोगों को भी यह ठीक करने वाली है।
– इन्दीवर मिश्र

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News Source: https://royalbulletin.in/turmeric-and-asafoetida-are-essential-for-health/21790

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