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UP: कृषि कानून के बहाने गन्‍ना सियासत में उबाल, आने वाले चुनावों में दिखाएगा असर

उत्तर प्रदेश में रिकार्ड गन्ना बकाया भुगतान का दावा भले किया जा रहा, लेकिन किसान संगठनों के मन में कड़वाहट है। कोरोनाकाल में भी गन्ना बकाया भुगतान को लेकर आंदोलन की नई पटकथा लिखी जा रही है। अक्टूबर माह में चीनी मिलों के संचालन से पहले किसान संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की कार्ययोजना बनाई है।

एक ओर भारतीय किसान यूनियन 17 अक्टूबर को सिसौली में पंचायत कर हवा का रुख परखेगी, वो बकाया भुगतान से पहले ब्याज लेने पर अड़े हैं। दूसरी ओर प्रदेश सरकार, गन्ना क्षेत्रफल, रिकवरी, उत्पादन, बकाया भुगतान, एथेनाल और चीनी उत्पादन में देश में नंबर एक बनने को बड़ी उपलब्धि बता रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि कानून की आड़ में चल रही किसान सियासत का पारा आगामी चुनावों तक चढ़ता रहेगा।

पश्चिमी उप्र में 55 से ज्यादा चीनी मिलें हैं। तकरीबन सभी जिलों में गन्ना प्रमुख फसल है, और किसानों की विकास यात्रा गन्ने पर निर्भर करती है। गन्ना ही पश्चिमी उप्र में सियासत का आधार भी रहा है। यही वजह रही कि तीन कृषि कानून और गन्ना बकाया भुगतान को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने 25 सितंबर को किसान कफ्र्यू के नाम से प्रदेश में विरोध प्रदर्शन किया था।

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