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योगी सरकार ने सौ वर्ष से ज्यादा पुराने वृक्षों को माना विरासत, मेरठ में ये नौ पेड़ चिह्न्ति

पौराणिक ग्रंथों में वायुमंडल को आक्सीजन के रूप में जीवन देने वाले पेड़ों में ईश्वर का वास माना गया है। वट वृक्ष की छांव में ऋषियों-मुनियों ने तप करते हुए ज्ञान अर्जति किया, जिसका पर्याप्त वैज्ञानिक आधार बताया गया है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने सौ वर्ष से ज्यादा उम्र के पेड़ों को विरासत घोषित किया है। इनके रखरखाव के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई गई है।योगी सरकार ने सौ वर्ष से ज्यादा पुराने वृक्षों को माना विरासत, मेरठ में ये नौ पेड़ चिह्न्तिप्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी राजेश कुमार बताते हैं कि जिले में सौ वर्ष से ज्यादा के पेड़ों की संख्या सैकड़ों में होगी, लेकिन महाभारतकालीन और अन्य ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के स्थलों पर लहराते सौ वर्ष से पुराने पेड़ों को संरक्षित करने की बड़ी कार्ययोजना तैयार की गई है।योगी सरकार ने सौ वर्ष से ज्यादा पुराने वृक्षों को माना विरासत, मेरठ में ये नौ पेड़ चिह्न्तिइस क्रम में नौ पेड़ अभी सामने आए हैं। बताया कि पेड़ों में पड़ने वाले वलय से उनकी उम्र का पता लगाते हैं। प्राचीन पांडेश्वर मंदिर के पास स्थित बरगद के पेड़ की गोलाई 6.8 मीटर पाई गई है, जिसकी उम्र 130 साल तक होने का अनुमान है। वैज्ञानिक शोधों के मुताबिक बरगद, पीपल, पाकड़, गूलर व कदंब जैसे पेड़ों से ज्यादा मात्र में आक्सीजन निकलती है। ये पेड़ वातावरण की कार्बन डाई आक्साइड को सोखकर भोजन बनाते हैं। हवा में तैरते विषाक्त सूक्ष्म कणों एवं भारी तत्वों को भी पेड़ अवशोषित कर वातावरण शुद्ध करते हैं।

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